चारों कषायें इंटरचेंजेबल हैं। मान की पूर्ति नहीं होती तो क्रोध आ जाता है, क्रोध से सफलता नहीं मिलती तो मायाचारी करने का लोभ आता है।
कषायों को संभालना वैसे ही है जैसे मेंढकों को तराजू पर तौलना।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – अगस्त 31)
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कषाय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए चारों कषायों पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। जीवन में सर्वप्रथम मान की पूर्ती से बचना चाहिए, जिसके कारण तीनों कषायों पर नियंत्रण हो सकता है।
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कषाय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए चारों कषायों पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। जीवन में सर्वप्रथम मान की पूर्ती से बचना चाहिए, जिसके कारण तीनों कषायों पर नियंत्रण हो सकता है।