कारुण्य भाव
दुखियों के प्रति कारुण्य भाव रखना/ हृदय द्रवित होना अच्छा है, पर दु:खी नहीं होना (दूसरों के दु:ख को अपने ऊपर ओढ़ना नहीं)।
कारण/ फायदा ?
सुख के समय फूलेंगे नहीं/ मन Balance रहेगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 7/11)
दुखियों के प्रति कारुण्य भाव रखना/ हृदय द्रवित होना अच्छा है, पर दु:खी नहीं होना (दूसरों के दु:ख को अपने ऊपर ओढ़ना नहीं)।
कारण/ फायदा ?
सुख के समय फूलेंगे नहीं/ मन Balance रहेगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 7/11)
One Response
करुण्य भाव का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।। अतः जीवन के कल्याण हेतु दुखियों के प़ति करुण्य भाव रखना परम आवश्यक है, लेकिन दूसरों के दुख अपने ऊपर ओढ़ना उचित नहीं है। इसके अतिरिक्त सुख में फूलना उचित नहीं है। अतः जीवन में समता भाव रखना परम आवश्यक है।