चोरी

आर्यिका विशालमति, जो आर्यिका विज्ञानमति से ज्येष्ठ हैं, ने उनसे ब्रह्मचर्य पर कुछ लिखने को कहा। बड़ी माताजी की प्रेरणा और सलाह से उन्होंने ‘शीलमञ्जूषा’ पुस्तक लिख दी और लेखक के रूप में बड़ी माताजी का नाम डाला।
विशालमति माताजी ने चोरी का दोष मान कर नमक छोड़ दिया। अंतत: दोनों का नाम डलवाया गया।

(अंजू – कोटा)

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2 Responses

  1. चोरी का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु चोरी करना पाप की श्रेणी में आता है, अतः इससे बचना परम आवश्यक है। दोनों माता जी की सहमती होकर नाम डाला गया है तो उसको चोरी कहना उचित नहीं है।

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