चोरी
आर्यिका विशालमति, जो आर्यिका विज्ञानमति से ज्येष्ठ हैं, ने उनसे ब्रम्हचर्य पर कुछ लिखने को कहा। बड़ी माताजी की प्रेरणा और सलाह से उन्होने ‘शीलमञ्जूषा’ पुस्तक लिख दी और लेखक के रूप में बड़ी माताजी का नाम डाला।
विशालमति माताजी ने चोरी का दोष मान कर नमक छोड़ दिया। अंतत: दोनों का नाम डलवाया गया।
(अंजू – कोटा)



