जीवन दर्पण

लिख रहा हूँ, यात्रा का विवरण,
मैं बिना लेखनी*|

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

(*अपने चारित्र के द्वारा प्रभावना करके)

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4 Responses

  1. मुनि महाराज जी का जीवन दर्पण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है! जीवन दर्पण में लिखने से कुछ नहीं होता है बल्कि जीवन में अच्छा व्यवहार, अच्छा चारित्र होना परम आवश्यक है! अतः सबकी जैन धर्म में आस्था होना चाहिए ताकि अच्छे गुण मिल सकते हैं!

    1. ‘लेखनी’ का शाब्दिक अर्थ है लिखने वाली जैसे कलम, पेन, पेन्सिल!

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