जैनदर्शन न द्वैतवादी है, ना ही अद्वैतवादी है।
द्वैतवादी संश्लेष तथा संयोग संबंधों को मानते हैं, अद्वैतवादी दोनों को नहीं।
जैनदर्शन तो इन दोनों संबंधों के अलावा तादाम्य संबंधों को भी मानता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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जैन दर्शन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन दर्शन अनेकांत वादी है। जैन दर्शन में निश्चय एवं व्यवहार दोनों सम्मिलित होना परम आवश्यक है।
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जैन दर्शन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन दर्शन अनेकांत वादी है। जैन दर्शन में निश्चय एवं व्यवहार दोनों सम्मिलित होना परम आवश्यक है।