तप/ ताप (गर्मी) से हम बहुत घबराते हैं। जबकि ताप के बिना न अनाज आदि पैदा होगा, ना ही उसे पचा (जठराग्नि) पाएंगे।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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आचार्य श्री विघासागर महाराज जी ने तप एवं ताप का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। तप एवं ताप दोनों ही जीवन के कल्याण के लिए परम आवश्यक है। तप एक साधना है, इसमें इच्छाओं पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। तप में अपनीं बुराईयां को मिटाना परम आवश्यकता है।
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आचार्य श्री विघासागर महाराज जी ने तप एवं ताप का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। तप एवं ताप दोनों ही जीवन के कल्याण के लिए परम आवश्यक है। तप एक साधना है, इसमें इच्छाओं पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। तप में अपनीं बुराईयां को मिटाना परम आवश्यकता है।