दान / त्याग
दान पर-वस्तु का जैसे धन आदि।
त्याग स्व-वस्तु का जैसे क्रोध आदि (कषाय)।
क्रोध तभी आता है जब मान को धक्का लगता है।
जैसे एक ने कहा… यह काम कर देना, काम न होने पर क्रोध आएगा।
दूसरे ने कहा… सुविधाजनक हो तो यह काम कर देना, काम न होने पर क्रोध नहीं आएगा।
मुनि श्री शैलसागर जी




One Response
दान/त्याग का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन में पुण्य अर्जित करने के लिए दान करना परम आवश्यक है।इसी प्रकार जीवन के कल्याण हेतु पापों यानी लोभ,मोह,क़ोध,कषायो का त्याग करना परम आवश्यक है।