दान देकर जो खुद ही अपने दान की बार-बार अनुमोदना करते हैं, उनको अतिरिक्त पुण्य मिलता है।
यदि दान देकर दुखी हुए तो अर्जित पुण्य में हानि होगी।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 11 अगस्त)
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दान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दान देकर दुखी होना यानी पुण्य अर्जित की जगह उसमें हानि होगी ऐसा विचार करना उचित नहीं होगा।
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दान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दान देकर दुखी होना यानी पुण्य अर्जित की जगह उसमें हानि होगी ऐसा विचार करना उचित नहीं होगा।