तत्त्व तो सब जीवों में एक ही आत्म तत्त्व पर द्रव्य अलग-अलग, आत्मा की अपेक्षा भी द्रव्य अलग-अलग, किसी में कुछ कर्म है किसी में कुछ और, कोई शुद्ध आत्मा कोई कम अशुद्ध है कोई ज़्यादा अशुद्ध है। लेकिन चिंतन अपन को एक आत्म तत्त्व का करना है। Reply
4 Responses
द़व/तत्व को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
Can meaning of the post be explained a little more in detail, please ?
तत्त्व तो सब जीवों में एक ही आत्म तत्त्व पर द्रव्य अलग-अलग, आत्मा की अपेक्षा भी द्रव्य अलग-अलग, किसी में कुछ कर्म है किसी में कुछ और, कोई शुद्ध आत्मा कोई कम अशुद्ध है कोई ज़्यादा अशुद्ध है। लेकिन चिंतन अपन को एक आत्म तत्त्व का करना है।
Okay.