धर्म बढ़ाना
सांसारिक कार्यों को करते हुए धर्म कैसे बढ़ाएँ ?
धर्म है क्या ?
वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। सांसारिक क्रियाएँ करते हुए वस्तुओं (जीव, अजीव, पापोदय, पुण्योदय) के स्वभावों को देखो। उनका चिंतन करो। उनके अनुसार अपने मन, वचन, काय की क्रियाओं को करो।
हर समय धर्म ही धर्म होगा। ब्याज में संसार भी बेहतर होगा।
चिंतन




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धर्म बढ़ाने के लिए मन, वचन,काया से अग्रसर होना परम आवश्यक है। धर्म को बढ़ाने के श्रद्भा एवं विश्वास रखना परम आवश्यक हो। इसके लिए सर्वप्रथम आत्मा का अनुभव एवं ज्ञान होना परम आवश्यक है।