प्राय: धर्म में आस्था तो होती है, निष्ठा (स्थिरता) नहीं,
इसलिए धर्म टिकता नहीं।
मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी
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धर्म को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए देव शास्त्र गुरु पर श्रद्धान रखना एवं आस्था के साथ निष्ठा रखना परम आवश्यकता है, ताकि धर्म टिक सकता हैं।
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धर्म को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए देव शास्त्र गुरु पर श्रद्धान रखना एवं आस्था के साथ निष्ठा रखना परम आवश्यकता है, ताकि धर्म टिक सकता हैं।