मनचाहा संघ परिवर्तन चाहने पर आचार्य श्री विद्यासागर जी ने अकेले रहने का आदेश दिया।
विदा के समय आचार्य श्री ने कहा… निश्चय-संघ तो रत्नत्रय है, बाकी सब तो व्यवहार-संघ है।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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4 Responses
निश्चय-संघ को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
संघ तो निश्चय से देखा जाए तो रत्नत्रय ही है। साधना में बाकी संघ काम आते हैं तो इन्हें व्यवहार ही कहा जाएगा। चौथे काल में तो सब निश्चय संघ में ही रहते थे। किसी मुनि को बाहर भेजते थे, उनको कंसोल करने के लिये कहते थे… बुरा बड़ा मत मानना यह तो तुम्हारे भले की चीज़ है।
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निश्चय-संघ को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
‘’निश्चय-संघ तो रत्नत्रय है, बाकी सब तो व्यवहार-संघ है।’ Is sentence ka meaning clarify karenge, please ?
संघ तो निश्चय से देखा जाए तो रत्नत्रय ही है। साधना में बाकी संघ काम आते हैं तो इन्हें व्यवहार ही कहा जाएगा। चौथे काल में तो सब निश्चय संघ में ही रहते थे। किसी मुनि को बाहर भेजते थे, उनको कंसोल करने के लिये कहते थे… बुरा बड़ा मत मानना यह तो तुम्हारे भले की चीज़ है।
Okay.