ऋद्धिधारी मुनिराजों के आहार के समय पंचाश्चर्य श्रावकों की विशुद्धि और पुण्य से होते हैं, जिसे अर्जित करना बहुत कठिन कार्य है, श्रमणों को ऋद्धि पाने की विशुद्धि से भी ज्यादा कठिन।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 13 अगस्त)
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पंचाश्वर्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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पंचाश्वर्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।