पाप / पुण्य
शिष्य…कौन सी आदत अच्छी, कौन सी बुरी और यह जीवन में कैसे आती हैं ?
गुरु ने कुटिया के एक तरफ औषधि के पौधे बुववाये, दूसरी ओर को खाली छोड़ दिया। कुछ दिनों बाद औषधि के पौधों को बड़ा करने में बहुत मेहनत करनी पड़ी, खाली जगह में खरपतवार अपने आप उग आई।
अच्छी आदतों/ पुण्य के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है। बुरी आदतें/ पाप बिना पुरुषार्थ के जैसे गुस्सा करना कोई सिखाता नहीं है।
ब्र. डॉ. निलेश भैया




One Response
पाप/पुण्य का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए पुण्य अर्जित करने के लिए अधिक पुरुषार्थ करना परम आवश्यक है। पापों का त्याग करना परम आवश्यक है। पापों में क़ोध, लोभ, मोह लालच आदि आतें है उनसे बचना परम आवश्यक है।