जब कण-कण में भगवान है तो मंदिर जाना क्यों ?
हवा तो धूप में भी पर उसका आनंद छाँव में ही क्यों / कार में हवा भरवाने पंपिंग स्टेशन पर जाते क्यों !
(श्रीमती शर्मा – पुणे)
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2 Responses
मंन्दिर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। भगवान् जब कण कण में बताया गया है, लेकिन उसमें किसी प़कार का सुख नहीं मिलता है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मिक सुख के लिए मंन्दिर जाना परम आवश्यकता है। मंदिर जाने पर सुख शांति प़ाप्त होती है।
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मंन्दिर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। भगवान् जब कण कण में बताया गया है, लेकिन उसमें किसी प़कार का सुख नहीं मिलता है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मिक सुख के लिए मंन्दिर जाना परम आवश्यकता है। मंदिर जाने पर सुख शांति प़ाप्त होती है।
Quite a thought-provoking post !