आचार्य श्री विद्यासागर जी के प्रवचनों में देखा जाता था कि पहले जो उनके प्रवचन होते थे, बाद में उससे हटकर हो गए थे, ऐसा क्यों ?
पहले आचार्यों में भी मतांतर पाए जाते हैं।
यह भी दर्शाता है कि आचार्य श्री लगातार चिंतन करते रहते थे।
निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी (जिज्ञासा समाधान)
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मतांतर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है । मतांतर के लिए चिंतन करना परम आवश्यक है।
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मतांतर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है । मतांतर के लिए चिंतन करना परम आवश्यक है।