दीपक (माँ रूप) पूरे घर को प्रकाशित करता है, पर दिया तले अंधेरा (माँ अपना ध्यान नहीं रखतीं)।
उस अंधकार को दूसरे दीपक दूर कर सकते हैं, ख़ुद प्रकाशित (श्रद्धा/ सेवा) होकर।
ब्र. (डॉ.) नीलेश भैया
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माॅ को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।माॅ ही पूरे परिवार को संस्कारो से बांधने का प़यास करती है।माॅ अपना ध्यान नहीं रखती है, बल्कि पूरे परिवार को उनके जीवन को सुधारने का प़यास करती रहती है एवं चरित्र वान बनाने में प़यास करती रहती है।
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माॅ को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।माॅ ही पूरे परिवार को संस्कारो से बांधने का प़यास करती है।माॅ अपना ध्यान नहीं रखती है, बल्कि पूरे परिवार को उनके जीवन को सुधारने का प़यास करती रहती है एवं चरित्र वान बनाने में प़यास करती रहती है।