मूल-प्रतिमा
एक इष्ट देव होते हैं जैसे वर्तमान चौबीस तीर्थंकर।
दूसरे आराध्य देव जैसे विद्यमान बीस तीर्थंकर, जिन्होंने हमारा Direct हित नहीं किया। हालाँकि यह पूजने योग्य हैं।
इसलिए मूल-प्रतिमा वर्तमान के चौबीस तीर्थंकर ही होते हैं।
मुनि श्री सुधासागर जी ने खुद अशोकनगर तथा ललितपुर में बीस तीर्थंकरों की स्थापना करवाई है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी



