मोक्षमार्ग
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे… “मोक्षमार्ग बाहर है ही नहीं।”
जैसे हवाई जहाज उठने के बाद बाहर दौड़ने में सहायक, पहियों को भी अंदर ले लेता है तभी ऊपर उठता जाता है/ गति आती है।
निर्यापक मुनि श्री संभवसागर जी
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे… “मोक्षमार्ग बाहर है ही नहीं।”
जैसे हवाई जहाज उठने के बाद बाहर दौड़ने में सहायक, पहियों को भी अंदर ले लेता है तभी ऊपर उठता जाता है/ गति आती है।
निर्यापक मुनि श्री संभवसागर जी
One Response
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने मोक्ष मार्ग का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। मोक्ष मार्ग आंतरिक, वैराग्य की भावना एवं साधना की परम आवश्यकता है। मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए निर्ग्रन्थ मुनियों की आवश्यकता होती है,जो रत्त्रत्रय धारण करना परम आवश्यक है।