विग्रह गति में कर्म बंध

कार्मण शरीर की वजह से विग्रह गति में कर्म बंध होता है ।

पं. रतनलाल बैनाड़ा जी

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4 Responses

  1. विग़ह-गति, विग़ह का अर्थ शरीर है। पूर्व भव के शरीर को छोडकर नवीन शरीर को ग़हण करने के लिए जीव गमन करता है। अपने कर्मो के आधार पर नवीन शरीर ग़हण करता है।

    1. कर्मबंध शरीर के माध्यम से ही होता है।
      विग्रहगति में औदारिक शरीर तो है नहीं, सो कर्मबंध कार्मण-शरीर के माध्यम से ही होता है

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