वीतरागता तब आती है जब राग बुरा लगने लगे,
पुण्य-फल से ऊब होने लगे।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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2 Responses
वीतरागता को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः वीतरागता हेतु संसारिक राग,मोह समाप्त होना परम आवश्यक है। इसके अतिरिक्त वैराग्य की भावना आना परम आवश्यक है।
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वीतरागता को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः वीतरागता हेतु संसारिक राग,मोह समाप्त होना परम आवश्यक है। इसके अतिरिक्त वैराग्य की भावना आना परम आवश्यक है।
‘वीतरागता’ ke baare me jaanne ka bahut hi saral tareeka hai ! Namostu Gurudev !