व्रत
व्रत निधि है, विरति निषेध*।
आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी (19 अगस्त 2024)
* पापों को ना कहना/ नहीं करना।
व्रत निधि है, विरति निषेध*।
आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी (19 अगस्त 2024)
* पापों को ना कहना/ नहीं करना।
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One Response
आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने व़त को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए व़त करने का मतलब अपने पापों को समाप्त करना परम आवश्यक है।