शरीर को पूज्य बनाने के दो तरीके…
1) शरीर को पूरा अपना मानो। तब ऐसे काम होंगे ही नहीं कि कोई निरादर कर पाए।
2) पूरा पराया मानो। इतना सताओ कि सहन करते-करते पूज्य बन जाए जैसे साधुजन करते हैं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 4 अक्टूबर)
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4 Responses
शरीर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए शरीर को अपना मानना उचित नहीं है बल्कि अपने शरीर को तपाने में लगना जरूरी है ताकि वैराग्य की और बढने में सहायक होगें। इसके अतिरिक्त आत्म कल्याण करना परम आवश्यक है।
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शरीर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए शरीर को अपना मानना उचित नहीं है बल्कि अपने शरीर को तपाने में लगना जरूरी है ताकि वैराग्य की और बढने में सहायक होगें। इसके अतिरिक्त आत्म कल्याण करना परम आवश्यक है।
1st statement ka meaning clarify karenge, please ?
पूरी तरह शरीर को अपना बनाने का मतलब उसे ऐसा अपना लो कि उसकी कोई इंसल्ट ना कर सके। तब मुझसे कोई ऐसा काम होगा नहीं तो शरीर पूज्य हो जाएगा।
Okay.