संसार / मोक्ष
संसार में रह कर आनंद आ रहा है तो मोक्ष कैसे !
संसार में रहकर आनंद में रह रहे हो तो संसार कैसे !!
ये आनंद संभव होगा संवेग भाव रखने से।
ये भाव आएगा जब संसार के स्वरूप को जानोगे/ चिंतवन करोगे,
साथ-साथ वैराग्य-भाव होगा, ये है मन का धन। इसके लिए शरीर का स्वरूप समझना/ चिंतवन करना होगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 7/12)



