वैज्ञानिक आइंस्टीन की सालों की मेहनत अचानक प्रयोगशाला में आग लगने से समाप्त हो गई।
आइंस्टीन…. अच्छा हुआ मेरी गलतियाँ समाप्त हो गईं, अब नये सिरे से बेहतर काम शुरु करुँगा।
एकता – पुणे
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2 Responses
सकारात्मक को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु हमेशा सकारात्मक भाव रखना परम आवश्यक है। नकारात्मक भाव से कोई अपना कल्याण नहीं कर सकता है।
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सकारात्मक को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु हमेशा सकारात्मक भाव रखना परम आवश्यक है। नकारात्मक भाव से कोई अपना कल्याण नहीं कर सकता है।
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