सत्य पहले तथा कई बार स्वीकारा जाता है तब एक बार कहा जाता है।
इस अपेक्षा से स्वीकार करने में ज्यादा शक्ति लगती है।
चिंतन
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2 Responses
सत्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सत्य को स्वीकार करना परम आवश्यक है। सत्य को स्वीकार करने में समय लग सकता हैं, लेकिन वह शक्तीशाली हो जाता है।
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सत्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सत्य को स्वीकार करना परम आवश्यक है। सत्य को स्वीकार करने में समय लग सकता हैं, लेकिन वह शक्तीशाली हो जाता है।
Very true. Wonderful Chintan !