स्वाध्याय को परम तप कैसे कहा गया ?
स्वाध्याय से ज्ञान और ज्ञान से एक क्षण में असंख्यात गुणी निर्जरा!
पर किनकी ? यदि श्रावक ज्ञान करले तो उसके होगी ??
छ्हढाला में स्पष्ट लिखा है, ३ गुप्ति के साथ;
और गुप्तियाँ मुनियों के ही होती हैं।
निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी
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8 Responses
स्वाध्याय/तप को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए श्रावक को स्वाध्याय एवं तप करना परम आवश्यक है। यह कथन सत्य है कि गुप्तियां मुनियों की होती हैं।
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स्वाध्याय/तप को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए श्रावक को स्वाध्याय एवं तप करना परम आवश्यक है। यह कथन सत्य है कि गुप्तियां मुनियों की होती हैं।
श्रावक ज्ञान करले ka meaning clarify karenge, please ?
यदि ज्ञान कर ले तो क्या उनके संख्यातगुणी निर्जरा होगी ?
स्वाध्याय aur स्वर ज्ञान ka relation explain karenge, please ?
स्वर ?
Yahan par kaunse gyaan ki baat ho rahi hai ? Ise clarify karenge, please ?
स्वाध्याय से तो श्रुतज्ञान ही होता है।
Okay.