स्व-पर कल्याण
दया/ पूजादि करके हम दूसरे का कल्याण/ उसे लाभ नहीं देते,
इससे अपना कल्याण करते हैं।
गरीब को लाभ हो भी सकता है/ ना भी/ नुकसान भी।
भगवान तो न खुश होते हैं ना ही नाराज़।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
दया/ पूजादि करके हम दूसरे का कल्याण/ उसे लाभ नहीं देते,
इससे अपना कल्याण करते हैं।
गरीब को लाभ हो भी सकता है/ ना भी/ नुकसान भी।
भगवान तो न खुश होते हैं ना ही नाराज़।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी