स्व-पर कल्याण

दया, पूजा आदि करके हम दूसरे का कल्याण नहीं करते; उसे लाभ नहीं देते। हम तो अपना कल्याण करते हैं।

हमारे दान से ग़रीब को लाभ हो भी सकता है, नहीं भी। नुक़सान भी हो सकता है।

भगवान न तो ख़ुश होते हैं, न ही नाराज़।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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One Response

  1. स्व -पर कल्याण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में स्वयं के कल्याण हेतु भगवान् एवं गुरुजनों से जो भी प्राप्त होता है,उस पर चलने का प़यास करना आवश्यक है। जहां तक गरीब का कल्याण हेतु उसको अपने बराबर लाने का प़यास करना आवश्यक है।

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