Day: February 19, 2025

पुरुषार्थ और नियति

पुरुषार्थ का अर्थ प्रयत्न नहीं, अपितु पुरुष का उद्देश्य है। आत्मा ही हो प्रयोजन जिसका वह पुरुषार्थ है, यही नियति है। अपने में ही पुरुषार्थ

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चेतना / शरीर

हम सब उत्पाद हैं, चेतना + पदार्थ (शरीर) के। चेतना, विचारपन देती है/ चाहना बढ़ाती है, गणित लगाती है, दुःख की निमित्त(कारण) है*। पदार्थ… विस्तारपना

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मंगल आशीष

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