Month: June 2025
अवगाहना/ आवली
अवगाहना घनफल रूप भी होती है(गाथा 96)। आवली को अवगाहना तथा भाव(गुणाकार रुप) में भी लिया है(गाथा 101)। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड –
परमात्मा
यदि पर की ओर देखना ही है तो “पर की आत्मा” की ओर क्यों न देखें! ताकि आप परमात्मा बन सकें। चिंतन
सम्यक्त्त्व/ईर्यापथ क्रियायें
सम्यक्त्त्व क्रियायें सम्यक्त्त्ववर्धनी होती हैं। ईर्यापथ क्रियायें पुण्य क्रिया है। आर्यिका अर्हम् श्री माताजी
भाषा समिति
अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण सत्ता के बारे में एक पुस्तक लिखी गई, नाम था “सोने की चिड़िया और लुटेरे अंग्रेज”। आचार्य श्री विद्यासागर जी उस पुस्तक
अहिंसा
आतंकवाद पर टिप्पणी करते हुए आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे… आतंक की हिंसा ही अहिंसा है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान –
कर्मबंध
ऋजुगति में कर्मबंध नहीं होता है क्योंकि इसका काल एक समय का है, विग्रह गति में होता है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड –
जिमीकंद
मूंगफली , सोंठ और हल्दी में जिमीकंद के दोष क्यों नहीं ? मूंगफली के दानों में आद्रता पहुँचती ही नहीं(सरफेस पर होती है, उसके प्रोटेक्शन
उत्साह
उदासीनता से न तो संसार चलता है, न ही परमार्थ। जब इनमें उत्साह रहता है, तब दोनों उत्सव बन जाते हैं। मुनि श्री सौरभसागर जी
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