कर्मबंध

ऋजुगति में कर्मबंध नहीं होता है क्योंकि इसका काल एक समय का है,
विग्रह गति में होता है।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड – 9 मई)

Share this on...

4 Responses

  1. कर्मबंध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।

  2. That means koi bhi ‘karmbandh’ ek samay se zyaada leta hai ? Ise clarify karenge,
    please ?

    1. कर्मबंध एक समय से ज्यादा समय लेता है, ऐसा नहीं। उसे मानें कि कर्मबंध पहले समय में कर रहा था,दूसरे समय में फिर कर्मबंध करने लगा क्योंकि दूसरे समय में जन्म ले लिया।ऋजुगति में समय बचा कहाँ! वह तो कुछ समय कहना है, इसलिए कहते हैं। जैसे विग्रह गति में अनाहरक रहता है जीव, लेकिन जब बगैर मोडे के जाता है तो आहारक कहा, सिद्धांत: गलत है। जीव ने पहले समय में आहार किया और दूसरे में फिर आहार करने लगा, बीच के समय में उसको अनहारक कहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives

June 27, 2025

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930