Month: June 2025

देश/सर्वघाती कषाय

प्रत्याख्यानावरण कषाय सर्वघाती क्योंकि चारित्र (सकल) नहीं होने देती। संज्वलन देशघाती क्योंकि चारित्र होने देती लेकिन यथाख्यात चारित्र ना होने देने की अपेक्षा सर्वघाती। मुनि

Read More »

विसंयोजना / उद्वेलना

विसंयोजना अनंतानुबंधी की ही, यह नरक में भी हो सकती है। इसमें 6-7 गुणस्थान से भी असंख्यातगुणी निर्जरा उस समय होती है जब विसंयोजना चल

Read More »

कषाय

क्रोध प्रीति को नष्ट करता है। मान, विनय को। माया, मैत्री, लोभ, सर्व विनाशक है। क्षुल्लक श्री जिनेंद्रवर्णी जी (शांतिपथ प्रदर्शक)

Read More »

प्रवचन

श्री विद्यासागर जी के प्रवचन पहले बहुत जटिल होते थे।‌ पर जैसे-जैसे उनकी आयु बढ़ती गई, प्रवचन सरल होते गये। कहा भी है वृद्धावस्था बचपने

Read More »

अबुद्धिपूर्वक

हर क्षेत्र में Best Performance अबुद्धिपूर्वक ही होता है जैसे वाद्य बजाते समय। शांतिपथ प्रदर्शक क्योंकि जब बुद्धि विश्राम करती है तब आत्मा Takeover कर

Read More »

मोक्ष मार्ग/मंज़िल

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे…  तीन उंगलियों (सम्यग् दर्शन ज्ञान चारित्र) को लिटा दो तो वह मोक्षमार्ग बन जाता है, खड़ा कर दो तो

Read More »

विचार

विचार कर्मों पर आधारित या पुरुषार्थ पर ? दोनों के संयोग से। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका समाधान – 23)

Read More »

जीव/पुद्गल विपाकी

जीव – विपाकी… जिसे जीव Direct Feel करें(जैसे घातिया कर्म)। पुद्गल – विपाकी… जैसे शरीर नामकर्म, Feel जीव ही करेगा लेकिन शरीर के माध्यम से,

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

June 20, 2025