आत्म-कल्याण
घर में रहकर आत्म-कल्याण कैसे करें ?
घर को “मेरा” ना मान कर, “बसेरा” मानना शुरू कर दो ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
घर में रहकर आत्म-कल्याण कैसे करें ?
घर को “मेरा” ना मान कर, “बसेरा” मानना शुरू कर दो ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
| M | T | W | T | F | S | S |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ||||||
| 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
| 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
| 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 |
| 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 |
| 30 | 31 | |||||
One Response
यह कथन सत्य है कि घर में आत्मकल्याण के लिए घर को मेरा न मानकर उसे बसेरा मानकर शुरू करना चाहिए ताकि आत्मकल्याण के लिए अग्रसर हो सकता है।