केवलज्ञान / पुरुषार्थ
जब केवलज्ञान में भविष्य दिख रहा है तो पुरुषार्थ का क्या महत्व रह गया ?
एक लड़के ने कीड़ा मुट्ठी में रखकर भगवान से पूछा → कीड़ा अगले मिनट में ज़िंदा रह जाएगा या मर चुका होगा ?
भगवान → यदि तुम मुट्ठी कसकर बंद कर लोगे तो वह मर जायेगा, मुट्ठी खोल दोगे तो जिंदा रह जायेगा।
भगवान कार्य के साथ-साथ कारण भी जानते हैं। कारण ही पुरुषार्थ है, जो हमारे हाथ में है।
आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी




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आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने केवलज्ञान एवं पुरुषार्थ को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए पुरुषार्थ करना परम आवश्यक है।