अगम्य स्थान

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया की आगम में अगम्य स्थान के बारे में वर्णन आता है। जिसमें अवधिज्ञान भी नहीं पहुँच सकते। उदाहरण दिया भरत चक्रवर्ती अवधि ज्ञानी थे पर उन्हें आहार विधि नहीं पता लगी, जैसे साइंस में ब्लैक होल, कर्ण की विद्या नहीं पहुँच पाई, देवों की गतिविधियों  को जानने उनकी सीमा में अवधिज्ञान नहीं पहुँच पाता है।


आचार्य श्री विद्यासागर जी (स्वाध्याय श्री भगवती आराधना- भाग 1, पृष्ठ 76)
सान्निध्य आर्यिका श्री पूर्णमति माता जी

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4 Responses

  1. आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने अगम्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।

  2. 1) कर्ण की विद्या kahan nahin pahunch paayi thi ?
    2) देवों की गतिविधियों को जानने kinki सीमा में अवधिज्ञान nahin pahunch paata hai ?
    In 2 points ko clarify karenge, please ?

    1. 1) युद्ध में जब उनको विद्या की जरूरत पड़ी तब विद्या काम नहीं आई क्योंकि उन्होंने विद्या धोखे से हासिल की थी इसलिए उनको शाप मिला था कि जब तुम्हें जरूरत पड़ेगी तो यह काम नहीं आएगी।
      2) देवों की गतिविधियों को जानने अवधि ज्ञान देवों की सीमा में नहीं जा पता है।

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