Day: April 15, 2026

अनुजीवी

“अनु” = अनुरूप/ उनमें हमारे प्राण। “जीवी” = जीवित रहने वाले/ जीवन, अस्तित्व इन्हीं से चलता है। प्रतिजीवी शरीर के। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ

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संस्कार

वृद्धावस्था में इन्द्रियाँ/ दिमाग शिथिल हो जाते हैं। जिन चीज़ों में पहले से रुचि है वही आगे बढ़ जातीं हैं। यदि खाने में तो खाते

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मंगल आशीष

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