Day: April 22, 2026

सम्यग्दर्शन के अंग

सम्यग्दर्शन के पहले 4 अंग/ भाव (निशंकितादि) स्वाश्रित हैं। अगले 4 (उपगूहनादि) पराश्रित। यदि पहले 4 संभाल लिए तो अगले 4 आसानी से संभल जाएँगे।

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साधु

काँपते हाथों को रोकने के लिये कहते हैं…. “साधो”। साधु वही जो विचलित होते मन को साध ले। ब्र. डॉ. नीलेश भैया

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मंगल आशीष

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