गूंगा कौन ?
जो प्रिय वचन नहीं बोलता, वह गूंगा है।
ज़ुबान दो काम करती है ••• रस लेने का और बोलने का भी। ख़ुद रस लेने के साथ-साथ दूसरों को भी रस आये, ऐसा बोलना चाहिए।
गूंगा भी इशारों से अपना काम चला लेता है।
शब्दों के घाव बहुत गहरे/ दुखदाई होते हैं।
किसी के अंत समय में अगर आपके कठोर शब्द याद आ गए तो उसका अंत ख़राब हो सकता है, जीवन भर की साधना मिट्टी में मिल सकती है।
बोलते तो वही हो जो जानते हो, सुनने में वह भी आता है जो आप नहीं जानते।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन- 3 मई)




One Response
गूंगा कोन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गूंगा के समक्ष शब्दों का चयन करना परम आवश्यक है।