केवलज्ञान
केवलज्ञानी का देखना दर्पण में दिखनेे जैसा है। दर्पण में अगर मेरी इमेज हिल रही है उसकी वजह से मैं नहीं हिल रहा बल्कि मैं हिल रहा हूँ इसलिए दर्पण में इमेज हिल रही है। ऐसे ही केवलज्ञान है जो मैं कर रहा हूँ वह केवलज्ञानी देख रहे हैं, न कि जो वह देख रहे हैं वह मैं कर रहा हूँ।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान- 6 मई)




One Response
केवल ज्ञान को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।