Can the following be clarified please: 1) ‘प्रथमानुयोग’ ko श्रुतज्ञान का विषय kyun nahi maana ? 2) Meaning of ‘धर्म का ज्ञान अनुगामी नहीं हो पा रहा है।’ Reply
1) श्रुतज्ञान को मन का विषय कहा, कथाओं में मन ज्यादा लगता नहीं। 2) मन तो विषय भोगों में लगा है तो हमारा अनुगामी कैसे होगा ! Reply
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श्रुतज्ञान को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
Can the following be clarified please:
1) ‘प्रथमानुयोग’ ko श्रुतज्ञान का विषय kyun nahi maana ?
2) Meaning of ‘धर्म का ज्ञान अनुगामी नहीं हो पा रहा है।’
1) श्रुतज्ञान को मन का विषय कहा, कथाओं में मन ज्यादा लगता नहीं।
2) मन तो विषय भोगों में लगा है तो हमारा अनुगामी कैसे होगा !
‘अनुगामी’ ka kya abhipraay hai, please ?
अगले जन्म में फॉलो नहीं करता।
Okay.