वीतरागी रागी को अपना जैसा बना सकते हैं जबकि रागी वीतरागी को नहीं।
कहा है “वंदे सदगुण लब्धये” (वंदना उसकी करो जिसके गुण पाना चाहते हो)
बड़ा वह जो यदि सड़क पर झुकेगा भी तो सिक्का उठाने के लिए ही झुकेगा, वहाँ जहाँ आत्मा का कल्याण हो।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 1 मई)
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6 Responses
रागी एवं वीतरागी का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए वीतरागी बनना परम आवश्यक है।
यहाँ कहा जा रहा है कि रागी वितरागी बन सकता है, बनेगा तभी जब वह झुकेगा, झुकेगा वही जो बड़ा/ समझदार हो। झुकने से ही वह अपने आत्मा का कल्याण करने का हुनर प्राप्त करेगा।
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रागी एवं वीतरागी का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए वीतरागी बनना परम आवश्यक है।
‘बड़ा वह जो यदि सड़क पर झुकेगा भी तो सिक्का उठाने के लिए ही झुकेगा, वहां जहां आत्मा का कल्याण हो’; Is sentence ka meaning clarify karenge, please ?
यहाँ कहा जा रहा है कि रागी वितरागी बन सकता है, बनेगा तभी जब वह झुकेगा, झुकेगा वही जो बड़ा/ समझदार हो। झुकने से ही वह अपने आत्मा का कल्याण करने का हुनर प्राप्त करेगा।
Sikka uthana yahan atma ke kalyan ka prateek hai na ? Ise clarify karenge, please ?
सही, तभी तो उसमें आगे लिखा है… “आत्मा के कल्याण के लिए”।
Okay.