बार-बार णमोकार मंत्र का उच्चारण करना/ पढ़ना द्वादशांग का पाठ है जो पुण्य बंध और कर्म निर्जरा में कारण होता है।
श्रुतकेवली को भी अंत समय में णमोकार याद रहना, उनके कई पूर्व भवों के पुण्य से होता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 28 मई)
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णमोकार को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए णमोकार का जप करना परम आवश्यक है।
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