उत्तम आर्जव धर्म
जितना आडंबर ज्यादा, उतनी उलझनें बढ़ती हैं।
एक बार बाहर दिखाने का क्रम बन गया फिर वह दिखावा आपकी मजबूरी बन जाता है। दिखावे वाले पर दुनिया विश्वास नहीं करती और दुनिया चलती विश्वास से ही है।
व्यक्ति की असली पहचान तब होती है जब उसको विश्वास हो जाता है कि उसे कोई देख नहीं रहा।
सरल दिखाना आसान है बनना कठिन, सरल बननेे के लिए बहुत कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं, तब आप दीवार से देवालय बन सकते हैं यदि अंदर का देव जागृत हो जाए तो।
शिष्य बननेे के लिए आडंबरों/ बहुरूपीपने को छोड़ना पड़ेगा।
हमारे रोल तो बहुत हैं पर आडंबर छोड़ने पर हम एक रोल मॉडल बन जाते हैं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 30 अगस्त)




One Response
उत्तम आर्जव धर्म का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सोच सीधी, सच्चा बोला जाना चाहिए, सीधा चलना एवं सच्चा जियो इन चार बिन्दुओं का पालन करना परम आवश्यक है, ताकि मायाचारी से बचा जा सकता है।