उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
जो आत्मा में विचरण करता, वह इंद्रियों के विचलन से बचता। इंद्रियों की दासता समाप्त होते ही आत्मा में विचरण शुरू हो जाता।
देर तक जगने वाले(समय माफिया) के विचार, विकारों में परिवर्तित होने लगते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी के हजारों ब्रह्मचारियों देखकर एक वैज्ञानिक दल ने कहा कि ब्रह्मचर्य संभव ही नहीं और यदि है भी तो उन्होंने दवाओं से अपने विकारों को दबा दिया होगा। उत्तर देते हुए कहा… हाँ दवा तो लेते हैं पर आचार्य विद्यासागर की अध्यात्म और वैराग्य की औषधि।
जो विकारों से हार जाते वही हार्मोन्स की बात करते। 10,10 उपवास करने वालों से पूछो, क्या उनकी भूख 3 दिनों के बाद दवाओं से दब गई थी ?
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 6 सितम्बर)




One Response
ब़हम्चर्य उतकृष्ट तप है। आत्मा में लीन रहना ब़हम्चर्य है। परिणामों की अत्यन्त निर्मलता का नाम ब़हम्चर्य है। ब़हम्चर्य के बिना साधना करना मुश्किल है। ब़ह्म यानी आत्मा के निकट काम बोध की लालसा दूर करती हैं। आत्म ज्ञान के बिना कल्याण नहीं हो सकता है। सन्तोष वृत रखना परम आवश्यक है।