शिविर समापन
जीवन विकास के 10 दिवसीय शिविर के समापन पर संबोधन…
बहुत से पुरस्कारों में पुरुष और महिलाओं के लिए एक-एक था, शिविर-चक्रवर्ती जिन्होंने पाँच इंद्रिय और मन को वैसे ही जीता जैसे चक्रवर्ती 6 खंडों को जीतता है।
जो शिविरार्थी आगे की कतार में नहीं आ पाए उनके लिए बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… भगवान के जन्माभिषेक के समय पहला कलश सौधर्म का नहीं, सबसे पीछे वाले देवता का होता है जो क्षीरसागर से कलश भरता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 7 सितम्बर)



