बहकावे/वास्तविकता
हम बहकावे और वास्तविकता के बीच जीते हैं।
बच्चों को भूत का डर, महाराज जी गुस्सा करेंगे, चुप हो जा कह कर मिथ्यात्व (गृहीत)/अवर्णवाद (गुरु) तथा हे! भगवान मेरे बच्चे के साथ ऐसा क्यों किया? –> देव अवर्णवाद।
अच्छा काम करोगे तो भगवान मिलेंगे –> भगवान को कर्ता बना देते हैं।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया




One Response
बहकावे एवं वास्तविकता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए बहकावे आने का प़यास नहीं करना चाहिए बल्कि उसकी वास्तविकता जानना परम आवश्यक है।