अहमिन्द्रों की धर्म-चर्चा अनंतकाल तक बिना दोहराये कैसे संभव ?
उनकी चर्चा का विषय प्रथमानुयोग होता है। महापुरुषों की संख्या अनंत सो चर्चा भी अनंतकाल तक।
गुरुजन
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अहमिन्द़ों की धर्म चर्चा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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अहमिन्द़ों की धर्म चर्चा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।