हिंसानंदी रौद्रध्यान यानी हिंसा में आनंद लेना।
पर इसका उल्टा भी हिंसानंद होगा –> “आनंद के लिये हिंसा करना जैसे शिकार।”
चिंतन
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हिंसानंदी को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अंहिसा वादी रहना परम आवश्यक है। जैन धर्म में अंहिसा का ही सिद्धांत बताया गया है।
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हिंसानंदी को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अंहिसा वादी रहना परम आवश्यक है। जैन धर्म में अंहिसा का ही सिद्धांत बताया गया है।
Bahut hi accha chintan ! Jai Jinendra Uncle !