गंगा / सिंधु
यह नदियाँ पद्म सरोवर से निकल कर पर्वत के ऊपर-ऊपर ही 500-500 योजन पूर्व में गंगा तथा पश्चिम में सिंधु बहकर फिर नीचे गिरतीं हैं। इस 500-500 योजन में आर्यखंड की सीमाएं पूरी हो जाती हैं। यानी गंगा सिंधु आर्यखंड में नहीं बहतीं। हमारी गंगा सिंधु अलग हैं।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 20/3 )



