मानुषोत्तर पर्वत पुष्कर-द्वीप के ठीक मध्य में नहीं है। बल्कि मनुष्य-लोक का आधा भाग निकल जाने/ पूरा हो जाने के बाद में है (मनुष्य की चालाकी / लोभ का एक और प्रतीक)।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र-अध्याय 3 – अगस्त 30)
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मानुषोत्तर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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मानुषोत्तर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।